बिहार के सभी विश्वविद्यालयों को दो साल पूर्व तक दी गयी राशि का हिसाब मांगा गया है। यह हिसाब शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों से उपयोगिता प्रमाणपत्र के रूप में देने को कहा है। उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, वित्त परामर्शी एवं वित्त पदाधिकारी जवाबदेह होंगे।

इससे संबंधित निर्देश शिक्षा विभाग द्वारा विश्वविद्यालयों को उस पत्र में दिये गये हैं, जिसके जरिये सेवानिवृत शिक्षक एवं शिक्षकेतरकर्मियों को सेवांत लाभ के भुगतान के लिए 281 करोड़ 91 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। यह राशि विश्वविद्यालयों को 21 अगस्त 2022 को दी गयी थी।

इन विश्‍वविद्यालयों से शिक्षा विभाग ने जताई नाराजगी।

शिक्षा विभाग ने पटना विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय एवं मुंगेर विश्वविद्यालय से उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर नाराजगी व्यक्त किया हैं।

इन विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को दिये गये निर्देश में शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि संपूर्ण उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उपयोगिता प्रमाणपत्र ससमय नहीं दिये जाने की स्थिति में सारी जवाबदेही संबंधित कुलपति, कुलसचिव, वित्त परामर्शी एवं वित्त पदाधिकारी की होगी।

शिक्षा विभाग ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि भारतीय अंकेक्षण तथा लेखा विभाग और राज्य सरकार के वित्त (अंकेक्षण) विभाग को स्वीकृत एवं विमुक्त राशि से किये गये भुगतान का अंकेक्षण किये जाने का पूर्ण अधिकार होगा।

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