महाराष्ट्र की सियासत को लेकर बड़ा फैसला आया है। चुनाव आयोग ने अजित पवार वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को ही असली एनसीपी करार दिया है। फैसला दिग्गज राजनेता और अजित के चाचा शरद पवार के लिए बड़ा झटका है। जानकारी के मुताबिक, छह महीने से अधिक समय तक चली 10 से अधिक सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने एनसीपी में विवाद का निपटारा किया और अजीत पवार के नेतृत्व वाले गुट के पक्ष में फैसला सुनाया। अब एनसीपी का नाम और चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ अजित पवार के पास रहेगा।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) पर दावे को लेकर आए केंद्रीय चुनाव आयोग के फैसले के बाद जहां शरद पवार गुट में निराशा का माहौल है, वहीं अजीत पवार गुट ने पूरे महाराष्ट्र में जश्न मनाना शुरू कर दिया है। शरद पवार की सांसद पुत्री सुप्रिया सुले चुनाव आयोग के फैसले को ‘अदृश्य शक्ति’ की जीत बता रही हैं, तो उन्हीं के गुट के विधायक जीतेंद्र आह्वाड का कहना है कि हमारा चुनाव चिह्न भी शरद पवार हैं, और हमारी पार्टी भी शरद पवार हैं।

सुप्रिया सुले ने चुनाव आयोग के फैसले को बताया षड्यंत्र

मंगलवार शाम चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद अजीत पवार ने कहा कि वह चुनाव आयोग के फैसले को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। लेकिन, शरद पवार गुट इस हार को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सुले ने दिल्ली में कहा कि जिसने पार्टी की स्थापना की और शून्य से यहां तक लेकर आए, आज उन्हीं को पार्टी से निकाल दिया गया। यह तो एक ‘अदृश्य शक्ति’ की ही विजय है। सुप्रिया सुले ने चुनाव आयोग के फैसले को षड्यंत्र बताते हुए कहा कि जो फैसला चुनाव आयोग ने पिछले वर्ष शिवसेना के बारे में सुनाया था, वही फैसला आज राकांपा के बारे में सुनाया है। सिर्फ पार्टियों के नाम बदल दिए हैं।

फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे शरद पवार

सुले के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पार्टी संगठन से बनती है, न कि विधायकों की संख्या से। जबकि, चुनाव आयोग ने विधायकों की संख्या के आधार पर फैसला सुनाया है। हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि शरद पवार ने अपनी 60 वर्ष की उम्र में एक नया दल खड़ा कर दिया था। अब हम पुन: एक नया दल खड़ा करेंगे। माना जा रहा है कि शरद पवार गुट अब शरद पवार के चेहरे को ही अपनी नई पार्टी के चुनाव चिह्न एवं शरद पवार के नाम ‘शरद गोविंद चंद्र पवार’ को पार्टी के नाम के रूप में चुनाव आयोग के सामने प्रस्तुत करने की योजना बना रही है।

अजीत पवार ने चुनाव आयोग के निर्णय पर खुशी जताई.

आयोग ने उसे बुधवार तक तीन नाम और तीन चिह्न देने के निर्देश दिए हैं। राकांपा पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा है कि वह जल्द ही इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे और उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव से पहले ही इस मामले में हमें न्याय देगा।दूसरी ओर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने चुनाव आयोग के निर्णय पर संतोष और खुशी जताते हुए कहा कि हम इस निर्णय को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। कुछ माह पहले महाराष्ट्र में जो राजनीतिक घटनाक्रम हुआ था, उसके बाद हमारी पार्टी का एक मसला चुनाव आयोग में गया था। वहां हमने अपना पक्ष रखा।

लोकतंत्र में संख्या बल से फैसला होता है.

चुनाव आयोग ने अब हमारी दलीलों को सही मानते हुए हमारे पक्ष में फैसला सुनाया है। इसी प्रकार का एक मामला राज्य विधानसभा अध्यक्ष के पास भी लंबित है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही उसका फैसला भी हमारे पक्ष में आएगा। सुप्रिया सुले द्वारा यह कहे जाने पर कि पार्टी पर अधिकार संगठन से होता है। अजीत ने कहा कि राज्य के ज्यादातर जिलाध्यक्ष और विधायक हमारे साथ हैं। लोकतंत्र में संख्या बल से ही फैसला होता है। इसलिए, चुनाव आयोग ने संख्या बल देखते हुए हमारे पक्ष में निर्णय दिया है।

चुनाव आयोग ने हमें सही माना

अजीत गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि हमारे दल के अधिसंख्य विधायकों ने मिलकर जो निर्णय किया था, उसे चुनाव आयोग ने भी सही माना है। चूंकि आयोग ने इस मामले में अपना विस्तृत निर्णय दिया है। निश्चित रूप से इसका लाभ हमें चुनाव में भी मिलेगा।

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